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कोरोना संकट और पढ़ाई







पढ़ाई (शिक्षा का एक रुप) प्रत्येक व्यक्ति के लिए बहुत ही आवश्यक है, लेकिन उसके लिए एक व्यक्ति की पारिवारिक एवं मानसिक स्थिति का सही होना भी उतना ही आवश्यक है। यहां कुछ व्यक्ति बहुत से ऐसे उदाहरण दे सकते हैं जिनमें व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई कर पाया। तो बंधु! अपवाद हर जगह होते हैं। वर्तमान कोरोना संकट पर नजर डालें तो अभी बहुत दूर तक भी इससे निजात पाने की संभावना नजर नहीं आ रही है परंतु उम्मीद का दामन तो नहीं छोड़ सकते न और हमें विश्वास है कि जब हम 68 दिन तक 4 फेज के लॉकडाउन से बाहर आ गए तो आगे भी सब अच्छा ही होगा। बात करते हैं कि एक विद्यार्थी किस प्रकार यह संकट का समय भी अपने स्वयं के लिए कारगर साबित कर सकता है। इसके लिए सबसे पहले तो विद्यार्थी की वास्तविक पारिवारिक स्थिति को जान लेना बहुत जरूरी है। इसके लिए हम विद्यार्थियों को कुछ वर्गों में बाँट लेते है - 1. अत्यधिक विषम पारिवारिक परिस्थिति वाला वर्ग 2. केवल मूलभूत आवश्यकता की पूर्ति वाला वर्ग 3. सामान्य पारिवारिक परिस्थिति वाला वर्ग 4. अच्छी पारिवारिक परिस्थिति वाला वर्ग



अब इन सभी वर्गों को एक-एक करके देखते हैं –







1.अत्यधिक विषम पारिवारिक परिस्थिति वाला वर्ग –

            इस वर्ग में हम उन बच्चों को सम्मिलित करते हैं जिनके परिवार को अभी दो वक्त का भोजन पाने के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। ऐसे विद्यार्थी को इस समय ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बाध्य करना कहाँ तक उचित है? क्या जब व्यक्ति का पेट खाली होता है तो वह पेट भरने के अलावा कुछ सोच पाता है? लेकिन पढ़ाई तो जरूरी है और जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू है तो ऐसी स्थिति में विद्यार्थी को चाहिए कि वह अपने घर में उपलब्ध पुरानी कक्षा की पुस्तकों को ही बार बार अच्छे से पढ़े ताकि उसका पढ़ाई से जुड़ाव बना रहे, साथ ही साथ अपने माता पिता के कार्यों में हाथ बँटाए जिससे पारिवारिक स्थिति में सुधार हो सके।







2. केवल मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति वाला वर्ग-

             ऐसा वर्ग अपना पेट तो भर पा रहा है लेकिन भविष्य की चिंताओं से ग्रस्त है। माता-पिता की आने वाले समय में नौकरी रहेगी या नहीं रहेगी इस बात से चिंतित है।आगे परिवार का गुजारा कैसे होगा यही सब उसके दिमाग में चलता रहता है। ऐसे वर्ग को पढ़ाई के लिए बाध्य करना/उस पर दबाव बनाना सर्वथा अनुचित है। ऐसे बच्चों को पढ़ाई के लिए क्या करना चाहिए? ऐसे बच्चों को चाहिए कि वह घर में उपलब्ध पुस्तकों की पुनरावृत्ति करते रहे,उन्हें बार-बार पढ़ते रहे ताकि हर टॉपिक पर उनकी पकड़ बन जाए।







3. सामान्य पारिवारिक स्थिति वाला वर्ग-







यह वर्ग कहीं न कहीं बाकी दो वर्गों की तुलना में अच्छी स्थिति में है। अतः इसके पास पढ़ने के ज्यादा विकल्प मौजूद है। यह वर्ग अपनी नई कक्षा की पुस्तकों को खरीद कर अच्छे से अध्ययन कर सकता है। यदि घर में स्मार्टफोन/ कंप्यूटर है तो यूट्यूब जैसे माध्यमों का प्रयोग कर अपनी पढ़ाई को सशक्त बना सकता है जरूरत है, तो बस नियमित अभ्यास की।





4. अच्छी पारिवारिक स्थिति वाला वर्ग-







इस वर्ग में बहुत कम लोग शामिल है क्योंकि कोरोना काल में 68 दिन तक निरंतर बंद रही अर्थव्यवस्था ने अच्छे-अच्छे को पानी पिला दिया है। खैर यह वर्ग इतना सशक्त है कि पढ़ाई के लिए ऑनलाइन साधनों का पहले से ही इस्तेमाल करता आ रहा है। अभी जैसे कि सभी स्कूल कॉलेज बंद है तो इस वर्ग को अपनी ज्ञान वृद्धि के लिए और अधिक समय मिला हुआ है। यदि एक नियमित दिनचर्या का पालन कर नई कक्षा की पुस्तकें, ऑनलाइन कोचिंग क्लासेस या ऑनलाइन यु ट्यूब क्लासेज का प्रयोग किया जाए, तो पढ़ाई की गति दोगुनी भी हो सकती है।







उपसंहार –



                  वास्तविक पारिवारिक एवं मानसिक स्थिति पढ़ाई के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। पढ़ाई ऐसा कार्य नहीं है जो किसी को बाध्यता से कराया जाए, परंतु जब हम किसी को पूरी तरह बंधन मुक्त कर देते हैं तो वह स्वच्छंद हो जाता है। आपने देखा भी होगा जब एक छोटे बच्चे को पहली बार स्कूल भेजा जाता है तो दो-चार दिन तो खुशी-खुशी जाता है पर उस के बाद में वहां जाने से कतराने लगता है। लेकिन फिर भी हम उसे भेजते रहते हैं। पढ़ाई के लिए थोड़े बंधन/बाध्यता भी जरूरी होती है। इंटरनेट का सही प्रयोग इस कोरोना के संकट के समय में भी हमें न केवल हमारी पढ़ाई से जोड़े रख सकता है बल्कि नई-नई चीज़ों को जानने में भी हमारा सहायक बन सकता हैं। हमने विभिन्न वर्ग के विद्यार्थियों के आधार पर पढ़ाई की संभावनाओं को इस आशा के साथ आपके सामने रखा कि यह कोरोना का संकट जल्दी ही हमारे जीवन से दूर होगा और हम सभी कोरोना-मुक्त सवेरा देखेंगे।

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8 comments:

  1. परिशोधित विचारों से प्रेरित लेख के लिए बधाई। - डॉ भोला दत्त जोशी

  1. Achha Likha hai...aur sach kahu aap jab tak mansik rup SE Khush nahi tab tak sab vyarth hai aur mujhe lagta hai agar bachha joh b padhe Mann se padhe ya apni surroundings SE seekhe us se se bkar gyaan is waqt koi Nahi hai.

  1. good

  1. Good artical

  1. Bohot khub likha hai or ye sahi bhi hai bacho ke liye

  1. It's good article 👍 on this
    article we will learn that study is more important in our life

  1. @champa singh

  1. VERY GOOD ARTICLE 👍 WE LEARN MANY THINGS FROM THIS ARTICLE 👍

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